आँखों की कैद में


आँखों की कैद में,

रहने दो अब मुझे•••••
कभी नूर बन के,
कभी मोतियों के जैसे
तिरने दो अब मुझे••••!

यूँ इस तरह
रुला के,
न रिहा करो मुझे,
आँखों की कैद मे ही,
रहने दो मुझे•••••••!!

Picture by Kat J (Unsplash)

खेल


खेलो खेल खेलो
मजे ले ले के खेलो 
खेलो खेल खेलो।

फुट बाल खेला?
या टेनिस,या फिर हॉकी,
या क्रिकेट?

थक जाओ तो
आराम कर लो ,पानी पी लो,
नहीं?थके नहीं?
ये कौन सा खेल है?
जिसमे थकते नहीं,
रुकते नहीं?

हम लोगों से खेलते हैं ,
उनकी भावनाओं से,
आदत है खेलने की ,
थकते नहीं,रुकते नहीं ।
इधर से सुना उधर दे डाला,
मजे लेने के लिए मसाला लगाया।
कई दिन कुछ ना सुना तो अपना पकाया
मसाला कम था तो तड़का भी लगाया।

नहीं नहीं ऐसा खेल ना खेलो
रुक जाओ थोड़ी सांस
तो ले लो ,
ना सुनो ,ना सुनाओ ,
अपने को ही नहीं ,
दूसरों को भी बचाओ,
अदात बुरी है ,
जल्दी बाहर निकल आओ।

यह जो कर रहे हो कब तक कर पाओगे?
कभी तो कर्मों के चक्र में फंस ही जाओगे ,
कभी शायद पकड़े भी जाओगे,
कहां जा के अपना मुंह छुपाओगे,
फिर शायद बहुत पछताओगे।

मेरी मानो खेल खेलो,
सिर्फ खेल खेलो,
लोगों से नहीं ,चीज़ों से खेलो,
फुटबाल ना सही क्रिकेट खेलो,
ना दौड़ा जाए तो लूडो खेलो,

सही में खेल खेलो,सबकी वाह वाही लेलो,
खेलो खेल खेलो
मजे ले ले के खेलो।

Picture by Aaron Burden (Unsplash)

दोस्त


दोस्त बहुत अच्छे होते है;

कुछ सच्चे,तो कुछ कच्चे होते हैं;
एक थाली में खाना;
भूख ना होने का करना बहाना;
मेरे पैसे बचाना,उस पर बात टाल जाना।
यही दोस्त पक्के होते हैं;
कुछ सच्चे,तो कुछ कच्चे होते हैं।

सिर पर हाथ रखे तो ठंडक पड़ जाए;
गले जो मिले तसल्ली मिल जाए;
गुस्से में भी जिनके प्यार नजर आए;
कुछ मेरे दोस्त ऐसे होते हैं;
कुछ सच्चे तो कुछ कच्चे होते हैं।

ना कभी आंखे फेरी;
ना कभी कुछ इज़हार किया;
मेरे लिए दुआ करी और मुझे संभाल लिया;
दिल की सुनी और मुझे स्वीकार लिया।
यही दोस्त मेरे अपने होते हैं;
कुछ सच्चे,तो कुछ कच्चे होते हैं;
दोस्त बहुत अच्छे होते हैं।

Picture by Cynthia Magana

रंजिशे ए जिंदगी

जिंदगी की आज कुछ तहकीकात की;
कुछ पुराने पन्नों की जांच पड़ताल की।

आदतन है ले बैठा था कलम;
स्याही ने गिर कर हकीकत पन्नों पर डाल दी।

क्यों उठे धुएं से परछाई बना रहे थे?
जिंदगी की हवा ने तो बनावट उधार दी।

हम गले मिले?
या गालों से गाल टकराएं;
खोखली सी हवा में वो गर्मी कहां से लाएं?

कमी है यहां कही प्यार कि;
हंसी भी हंस रहे शायद उधार की।

आहट और कदमों कि हलचल का मुआयना करें;
जिन्दगी की रेत पर पदचाप से पड़े;

तहकीकात में ना जाने क्या बाकी रह गया;
पन्नों पे जो था धुंधला सा दिख रहा;
ना हाथों को पकड़ा,ना गालों पे ताल दी;
जिंदगी तुझसे रूबरू होने मैं सदिया गुज़ार दीं।

Picture by Fancycrave (Unsplash)

क्षितिज से अनंत तक

बांटा है समय ने,कुछ ऐसी गहराई से;
दो छोर के बीच का सफर मेरा
मानो घिर गया है धुंद और परछाई से।

है अलग अलग सा अहसास बहुत;
कभी पीड़ा,कभी अल्हाद बहुत;
है शिखर पर भावनाओं की, खड़ी हो सोच रही;
क्षितिज सा और अनंत सा रहा हर मेरा अनुभव;
अंतराल के खालीपन ने अनंत से मिला दिया।

हाथो में थी समय की गांठ;
फिसल गई शायद ढीली हो चली थी;
खो कर भी लगा सब पाया है;
क्या कभी क्षितिज या अनंत को कोई पकड़ पाया है?

Picture by Sweet Ice Cream Photography (Unsplash)

जानती हूँ


कौन रहता साथ हमेशा,
जानती हूँ, फिर भी चाहती हूँ.••••
वो भी इस बात में
शामिल है,
जानती हूँ,फिर भी कहती हूँ•••••
चुन रही हूँ,गुलों की
शक्ल मे काँटे,
जानती हूँ,फिर भी
चुनती हूँ•••••
या तो रुक जाऊँ,
या गम उठाऊँ,
या छोड के निकल जाऊँ,
जानती हूँ,फिर भी चलती हूँ•••••
दर्द का दर्द ही दवा मेरी,
जानती हूँ,फिर भी रोती हूँ•••••

तन्हा


ख्वाबों को हक़ीक़त,
समझने लगी,
तब से परेशां,
मैं रहने लगी••••••!
कुछ नहीं,
बंद पलकों के परे
स्याह अंधेरों के सिवा,
उन्हीं स्याही से,
रंगीन सपने,मैं
उकेरने लगी.•••••••!!
क्या तस्वीर बनती,
क्या बनाये जा रही हूँ,
खामखाँ लकीरें,
खीचनें लगी•••••!!!
हांथ खाली
न रंग,न कलम
फिर भी किस्से कई
मैं बनाने लगी••••••!!!!
तन्हा राहों की
मैं तन्हा राहगीर,
अपनी तन्हाई से,
इश्क़ मैं करने लगी••••••!

सुन लीजिए


कुछ नहीं मै,
बस धड़कते दिल के सिवा,
गर महसूस हो तो,
महसूस कर लिजिये..
भावों का ही बस,
है मुझमें बसेरा,
यकीं गर हो तो,
बस जाईये..
और कुछ नहीं,
बस खाली हूँ मैं,
चुप सदाओं को मेरी
ही सुन लीजिए.