मेरे पिता


This poem is about a son’s love for his father. It begins describing the father’s and goes on to show love the son has for his father. “His father is everything to him. He knows what his father did and how much he sacrificed for his son. In the end, it is clearly shown that “he reveres his father as God”.

किसी ने लिखा है,
सूखे पत्ते पेड़ो से
रिश्ता तोड़ जाते है
और बाप अपाहिज हो जाये
तो बेटे रिश्ता तोड़ जाते है…
मगर मेरी कुछ ऐसे राये है .
मुझे सुला कर छाओ मै
खुद जलते रहे धूप मै
मुझे बचा कर बारिश से
खुद जलते रहे अंगारो मै,
मैंने देखा है एक फ़रिश्ते को
आपने पिता के रूप मै…
मेरी आना, मेरी शान, मेरे अभिमान है मेरे पिता
पिता नहीं तो मै भी कुछ नहीं
क्युकी मेरी पहचान है मेरे पिता…
पिता है तो हर ख्वाब पुरे है
पिता नहीं तो कुछ भी नहीं,
पिता है तो बाजार के सारे खिलौना आपने hai..
पिता नहीं तो दो वक्त की रोटी भी नहीं…
पिता है तो बचपन सुहाना है
पिता नहीं तो सब कुछ अधूरा सा है,
पिता है तो नन्ही सी गुड़िया मै जान है
पिता नहीं तो माँ का स्वाघ भी नहीं.
मेरी आना, मेरी शान, मेरे अभिमान है मेरे पिता
पिता नहीं तो मै भी कुछ नहीं
क्युकी मेरी पहचान है मेरे पिता…
बचपन मै अपनी अंगुली पकड़ कर चलना सिखाया.
मै गिरा मगर आपने मुझे उठना सिखाया..
आपने कंधे मै बैठा के
मेला मुझे घुमाया
मैंने माँगा एक खिलौना
आपने दस मुझे दिलाया..

आपके ही नाम से मेरा नाम है
आपकी पहचान से मेरा पहचाहन है…

मेरी आना, मेरी शान, मेरे अभिमान है मेरे पिता
पिता नहीं तो मै भी कुछ नहीं
क्युकी मेरी पहचान है मेरे पिता…
*मेरे लिए तो मेरे भगवान है मेरे पिता*

Picture by Nick Wilkes (Unsplash)

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