Are you in love with me or with the game?

I chose the rose as a symbol of love and the chessboard as a symbol of the game.

Love that is limitless and unconditioned in its fullness and the game that includes boundaries, strategies, rules, and deceivers; two very opposite and yet mostly connected things.

It is precisely this difficulty of life to accept the boundary between the infinite source and the limit of the mind.

दोस्त


दोस्त बहुत अच्छे होते है;

कुछ सच्चे,तो कुछ कच्चे होते हैं;
एक थाली में खाना;
भूख ना होने का करना बहाना;
मेरे पैसे बचाना,उस पर बात टाल जाना।
यही दोस्त पक्के होते हैं;
कुछ सच्चे,तो कुछ कच्चे होते हैं।

सिर पर हाथ रखे तो ठंडक पड़ जाए;
गले जो मिले तसल्ली मिल जाए;
गुस्से में भी जिनके प्यार नजर आए;
कुछ मेरे दोस्त ऐसे होते हैं;
कुछ सच्चे तो कुछ कच्चे होते हैं।

ना कभी आंखे फेरी;
ना कभी कुछ इज़हार किया;
मेरे लिए दुआ करी और मुझे संभाल लिया;
दिल की सुनी और मुझे स्वीकार लिया।
यही दोस्त मेरे अपने होते हैं;
कुछ सच्चे,तो कुछ कच्चे होते हैं;
दोस्त बहुत अच्छे होते हैं।

Picture by Cynthia Magana

Abhiruchi

Abhiruchi is a Hindi/Sanskrit word which means an unconditional interest in someone. The song is about falling in love with someone you have never met.

Hubris Calls For Nemesis

It is about the moment when we go too far and overestimate ourselves because we are convinced how better we are than others. The picture shows what is really under the facade of confidence and apparent strength. Insecurities, therefore, distance the abyss and the fear of falling, which forces us to stay behind the border and make a connection with others and thus with oneself at an eye level, impossible. Simply put, it’s about narcissism.

रंजिशे ए जिंदगी

जिंदगी की आज कुछ तहकीकात की;
कुछ पुराने पन्नों की जांच पड़ताल की।

आदतन है ले बैठा था कलम;
स्याही ने गिर कर हकीकत पन्नों पर डाल दी।

क्यों उठे धुएं से परछाई बना रहे थे?
जिंदगी की हवा ने तो बनावट उधार दी।

हम गले मिले?
या गालों से गाल टकराएं;
खोखली सी हवा में वो गर्मी कहां से लाएं?

कमी है यहां कही प्यार कि;
हंसी भी हंस रहे शायद उधार की।

आहट और कदमों कि हलचल का मुआयना करें;
जिन्दगी की रेत पर पदचाप से पड़े;

तहकीकात में ना जाने क्या बाकी रह गया;
पन्नों पे जो था धुंधला सा दिख रहा;
ना हाथों को पकड़ा,ना गालों पे ताल दी;
जिंदगी तुझसे रूबरू होने मैं सदिया गुज़ार दीं।

Picture by Fancycrave (Unsplash)

क्षितिज से अनंत तक

बांटा है समय ने,कुछ ऐसी गहराई से;
दो छोर के बीच का सफर मेरा
मानो घिर गया है धुंद और परछाई से।

है अलग अलग सा अहसास बहुत;
कभी पीड़ा,कभी अल्हाद बहुत;
है शिखर पर भावनाओं की, खड़ी हो सोच रही;
क्षितिज सा और अनंत सा रहा हर मेरा अनुभव;
अंतराल के खालीपन ने अनंत से मिला दिया।

हाथो में थी समय की गांठ;
फिसल गई शायद ढीली हो चली थी;
खो कर भी लगा सब पाया है;
क्या कभी क्षितिज या अनंत को कोई पकड़ पाया है?

Picture by Sweet Ice Cream Photography (Unsplash)